कश्मीर फ़ाइल्स:-अवधारणा, नैरेटिव और अनुवाद
, नैरेटिव और अनुवाद एक सामान्य मनुष्य के जीवन में अनुवाद से बने नरेटिव हि अवधारणा बनाते हैं अनुवाद के माध्यम से जो नैरेटिव बनाए जाते हैं, महत्वपूर्ण इसलिए हैं क्योंकि धार्मिक अवधारणाओं पर आधारित हैं. जैसे सनातन मेंनाग को देव माना जाता है, नागों को मानव के साथ सृष्टि का एक सहायक ही माना गया है. उन्हें मानव का शत्रु नहीं. नाग को महादेव कीगर्दन में सुशोभित किया गया है. यहाँ तक कि जब प्रलय से पहले मनु नौका का निर्माण कर रहे हैं और शतरूपा इस ऊहापोह में हैं किकिसे किसे बचाया जाए, तो वह कहती हैं कि विषैले नागों का भी जोड़ा रख लेती हूँ, औषधि के काम आएगा.
वहीं अब्राहम रिलिजन या कहें पश्चिम और अरब की धरती से जो रिलिजन आए उनमें नाग को वह कारक बताया गया जिसके कारणआदम को स्वर्ग से निष्कासित होना पड़ा था और उसके पास श्राप था कि उसे आदम खोज खोज कर मारेगा. यहाँ नाग की पूजा है, नागपंचमी है, वहां नाग शत्रु है,
तो ऐसे में जब सनातन के किसी धार्मिक ग्रन्थ का अनुवाद पश्चिम से आया हुआ कोई करेगा और नाग देवता लिखेगा तो उपहास केसाथ लिखेगा,
वह सहजता के साथ नाग देवता को प्रणाम नहीं लिख पाएगा, और यह असहजता कई अनुवादों में परिलक्षित सी होती है
यह मात्र एक शब्द का उदाहरण है, इसे ही पकड़ कर न बैठिएगा, अपितु यह समझने का प्रयास करियेगा कि जो अनुवाद हुए, और जिसअनुवाद को ही हमने सोर्स ग्रन्थ मान लिया, उसका देखने का दृष्टिकोण क्या था.
मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में तीन गिरोह काम करते हैं। पहला खान गैंग। दूसरा कपूर गैंग और तीसरा सेकुलर गैंग। इसमें जो खान कपूरगैंग है वह मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में भाई भतीजावाद, फाइनेन्स, स्टारडम, डिस्ट्रीब्यूशन आदि पर नियंत्रण रखता है। जिसे चाहता है उसे पर्देतक आने देता है, जिसे नहीं चाहता, उसे बाहर करवा देता है। इस खान कपूर गैंग के शिकार कई होंगे। फिलहाल इनकी हिटलिस्ट मेंकार्तिक आर्यन है। सुशांत सिंह को खत्म करने के बाद इस वक्त ये गैंग इस नवोदित अभिनेता को खत्म करने में लगा हुआ है।
लेकिन इन दोनों गैंग के अलावा एक तीसरी गैंग है। वह है सेकुलर गैंग।
मुंबई फिल्म इंडस्ट्री की इस सेकुलर गैंग को दिल्ली, यूपी, बिहार और बंगाल से गये कॉमरेड आपरेट करते हैं। मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री मेंसत्य को सेकुलरिज्म के कारपेट के नीचे छिपाने का वैचारिक धरातल यही गैंग तैयार करता है और उसमें मदद करता है अवधारणा, नैरेटिव और अनुवाद । यह गैंग मुंबई फिल्म इंडस्ट्री की बहुत पुरानी गैंग है। साठ और सत्तर के दशक में प्रगतिशील सिनेमा के नाम परबहुत सारी साजिशें पर्दे तक पहुंचाई गयीं जिसका प्रभाव समूचे भारत के जनमानस पर हुआ। सिनेमा या नाटक मनुष्य के मन पर बहुतबारीक प्रभाव डालता है जो प्रत्यक्ष रूप से कहीं दिखता नहीं लेकिन व्यवहार और सोच में उसका असर आ ही जाता है। ये बात कॉमरेडबिरादरी जानती है इसलिए उन्होंने साहित्य के अलावा नाटक और सिनेमा को एक युद्धभूमि की तरह इस्तेमाल किया। और तथ्यों केअनुवाद को बदल कर अपना नरेटिव सेट किया।कश्मीर फाइल्स अव्वल तो बनती नहीं, अगर बन भी जाती तो बनकर किसी कोने में पड़ीरहती। न तो उसकी समीक्षा होती। न उसका प्रमोशन होता। न उसे डिस्ट्रीब्यूटर मिलते और न ही दिखाने के लिए स्क्रीन। लेकिन शायदसमय बदल गया है और जब समय बदलता है तो वह भी संभव हो जाता है जो कल्पना करना मुश्किल होता है। यह बदले समय कापरिणाम है कि आठ दस करोड़ की फिल्म भी सौ दो सौ करोड़ के क्लब में शामिल होने चल पड़ती है।
अच्छा हो कि बॉलीवुड के खान कपूर और सेकुलर गैंग इस बदलते समय को पहचान लें और सत्य को साजिश से परेशान करना बंद करदें। वरना वो भी जाएंगे और उनका बालीवुड भी।
Bahut sundar
जवाब देंहटाएं🙏🏻🙏🏻
जवाब देंहटाएंसमर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध
जवाब देंहटाएंजो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध
🙏🏻🙏🏻
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