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एशिया मे अशांति के पीछे कौन?

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एशिया के कई देशों में बीते कुछ वर्षों में जो घटनाएं घट रही हैं, वे यह संकेत दे रही हैं कि महाद्वीप की राजनीतिक व्यवस्थाओं को अस्थिर करने के लिए एक सुनियोजित वैश्विक रणनीति काम कर रही है। हाल ही में नेपाल में बड़े पैमाने पर हुए जनआंदोलन और संसद भवन में आगजनी जैसी घटनाओं के बाद वहां के प्रधानमंत्री ने अपने सांसदों के साथ इस्तीफा दे दिया। यह मात्र एक आंतरिक राजनीतिक संकट का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे स्तर पर चल रही “डीप स्टेट” की गतिविधियों का भी संकेत मिलता है। डीप स्टेट का आशय ऐसी शक्तियों से है जो औपचारिक लोकतांत्रिक तंत्र से बाहर रहकर पर्दे के पीछे से राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों को प्रभावित करती हैं। यह शक्तियाँ कभी वित्तीय संस्थानों के माध्यम से, कभी अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मीडिया के जरिए, तो कभी स्थानीय असंतोष को उकसाकर अपनी रणनीति को लागू करती हैं। नेपाल में जो आंदोलन देखने को मिला, उसमें आर्थिक असंतोष, राजनीतिक अव्यवस्था और जातीय-क्षेत्रीय तनाव की भूमिका तो है, परंतु इसे हिंसक रूप देने और इसे संसद भवन तक पहुंचाने में बाहरी शक्तियों की भूमिका को ...

डीप स्टेट बनाम भारतीय राष्ट्रवाद

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 भारत आज वैश्विक राजनीति के केंद्र में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बनाई है। लेकिन जैसे-जैसे भारत आत्मनिर्भरता, सशक्त राष्ट्रवाद और भू-राजनीतिक संतुलन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उसी अनुपात में तथाकथित " डीप स्टेट" (Deep State) की गतिविधियाँ भी तेज़ हो रही हैं। डीप स्टेट को सामान्यत: वैश्विक ताक़तों, गुप्त नेटवर्क, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, मीडिया गठजोड़, थिंक टैंकों और कुछ राजनीतिक–ब्यूरोक्रेटिक हितसमूहों के संयुक्त तंत्र के रूप में समझा जाता है। इनका उद्देश्य किसी भी राष्ट्र की स्वतंत्र नीतियों को नियंत्रित करना, उसे अस्थिर करना और अपनी रणनीतिक व आर्थिक वर्चस्व को बनाए रखना होता है। डीप स्टेट की रणनीति यह रही है कि वह दक्षिण एशिया के देशों को राजनीतिक अस्थिरता में उलझाकर अपनी पकड़ बनाए रखे।श्रीलंका को आर्थिक संकट में धकेलकर पश्चिमी आर्थिक संस्थाओं और रणनीतिक गठबंधनों ने चीन व भारत के प्रभाव को चुनौती दी।पाकिस्तान को राजनीतिक अस्थिरता, सेना–राजनीति टकराव और आईएमएफ की शर्तों पर झुकाकर पूरी तरह बाहरी ताक़...