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आत्मप्रवंचना:-एक सांस्कृतिक संकट

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बाजार और परिवार मानव जीवन की दो अत्यंत महत्वपूर्ण इकाइयाँ हैं, किन्तु दोनों का आधारभूत स्वरूप एक-दूसरे से पूर्णतः भिन्न होता है। बाजार का आधार व्यापार है और परिवार का आधार प्यार। बाजार में संबंधों का निर्माण आवश्यकता, लाभ और विनिमय के आधार पर होता है, जबकि परिवार में संबंध आत्मीयता, त्याग, विश्वास और सांस्कृतिक मूल्यों पर टिके होते हैं। बाजार में व्यक्ति वस्तु और मूल्य के माध्यम से जुड़ता है, वहाँ हर संबंध किसी न किसी शर्त से बंधा होता है। यदि लाभ समाप्त हो जाए तो संबंध भी समाप्त हो जाते हैं। इसलिए बाजार में सबसे महत्वपूर्ण तत्व “विश्वसनीयता” होता है, क्योंकि व्यापार बिना विश्वास के चल ही नहीं सकता। व्यापारी और ग्राहक दोनों एक-दूसरे की विश्वसनीयता को परखते हैं। वहाँ व्यवहार का केंद्र संविदा, अनुबंध और लाभ होता है। लेकिन परिवार का स्वरूप इससे बिल्कुल अलग होता है। परिवार केवल जैविक या आर्थिक इकाई नहीं है, बल्कि वह एक सांस्कृतिक संस्था है, जो विश्वास और आत्मीयता की अदृश्य डोर से जुड़ी होती है। परिवार में माँ अपने पुत्र से यह शर्त नहीं रखती कि वह भविष्य में उसका लाभ लौटाएगा, पि...