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अल्पसंख्यक समाज का बहुसंख्यक पे शासन

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एक 'असहिष्णु अल्पसंख्यक समाज' किस प्रकार से एक 'सहिष्णु बहुसंख्यक समाज' पर शासन करता है और न सिर्फ शासन करता है बल्कि उसे घुटनों पर ले आता है इसका सबसे अच्छा उदाहरण लॉक डाउन के समय नवरात्रि और रमजान पर सरकार और प्रशासन के रवैये को देखकर समझा जा सकता है। प्रशासन को यह विश्वास था कि हिन्दू समाज किसी भी नई परिस्थिति में स्वयं को ढाल लेगा और देशहित और समाजहित के लिए अपनी व्यक्तिगत आस्था और मान्यता को तिलांजलि दे देगा ।ऐसा उसने इस बार लॉक डाउन के समय आए नवरात्रि के पर्व पर किया भी। परंतु यह विश्वास प्रशासन को मुस्लिम समुदाय के बारे में नहीं था ।उसे मालूम था कितनी भी सख्ती कर ली जाए लॉक डाउन के समय आए रमजान में मुस्लिम समाज किसी भी नियम का पालन नहीं करेगा । वास्तव में रमजान में छूट देकर प्रशासन ने मुस्लिम समुदाय के साथ अपने संभावित संघर्ष को ही टाला है। ऐसा कर प्रशासन ने अपनी इज्जत बचा ली है। इससे आगे जाकर रमजान के समय न सिर्फ नियमों में छूट दी गई है बल्कि क्वॉरेंटाइन में रखे गए मुस्लिमों के लिए इफ्तार और सेहरी के विशेष प्रबंध भी किए गए हैं लेकिन इसके उलट ...