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हिजाब :-धर्मांधता बनाम स्वतंत्रता

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​ आजकल राष्ट्रीय मीडिया से लेकर चौक चौराहे तक” हिजाब “ बहस का विषय बना है।लेकिन यह अवसर होता है एक ख़ासवर्ग के लोगों के चरित्र पहचानने का जो धर्मनिरपेक्षता को आधार पे सिर्फ़ एक धर्म को ही टार्गेट करते है! पर्दा प्रथा को आधार बनाकर एक धर्म की निंदा करना और हिजाब पे चुप हो जाना इनकी विशेषता है। जब यह बहस प्रारंभ होता है कि दहेज, पर्दा प्रथा और बाल विवाह ये इस्लाम के कारण हिन्दुओं में फैले तो बहुत सारे मुसलमान ही विरोध करने लगते हैं। कर्नाटक में मुस्लिम लड़कियों द्वारा जारी हिजाब आंदोलन  उसी बात पर मोहर है कि पर्दा प्रथा, बाल विवाह और दहेज ये इस्लाम की अनिवार्य बुराइयां जो लंबे समय तक इस्लामिक शासन के कारण भारत के हिन्दुओं में भी फैल गयी।  महिलाओं द्वारा अनिवार्य रूप से सर को ढंककर रखना या साड़ी का लंबा घूंघट निकालना ये भारत की किसी भी क्षेत्रीय वस्त्र परंपरा का हिस्सा नहीं रहा है। भारत में स्त्रियों का व्यापक रूप से जो पहनावा रहा है वह साड़ी ही है। साड़ी में घूंघट वाली व्यवस्था भी सिर्फ उत्तर भारत में ही दिखती है क्योंकि यही हिस्सा लंबे समय तक इस्लाम के सर्वाधिक प्रभाव में ...

बेरोज़गारी और वामपंथ

  भारत   में   आज़ादी   के   बाद   कमरेडो   ने   राजनैतिक   महत्वकांक्षा   के   इतर   अपने   वर्ग   विभाजन   और   सामवैधानिक   व्यवस्था   को   ध्वस्त   करने   के   लिए   नीति निर्माण   के   माध्यम   से   एक   आत्मविरोधी   व्यवस्था   बनाना   था   इस   प्रयास   में   इन   लोगों   ने   शिक्षा   से   लेकर   तमाम   क्षेत्रों   में   ऐसी   व्यवस्था   का   निर्माण   किया   जो विशुद्ध   भारतीय   चेतना   के   अनुकूल   नही   थी ।   इनका   लक्ष्य   था   की   आत्मबिरोधो   से   पूर्ण   यह   व्यवस्था   स्वयं   ही   ध्वस्त   हो   जाएगी ।   अपने   इस   मंसूबे   को कामयाब   करने   के   लिए   इन   लोगों   ने   स...