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अगस्त 7, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

संस्कृति पार्ट-1

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वर्तमान में वैश्विक महामारी के इस काल मे अधिकांश लोग आपको भारतीय सभ्यता और संस्कृति पे ज्ञान देते नजर आ जाएंगे।लेकिन इनमें कुछ मौलिक तथ्य जिन्हें समझने की जरूरत है प्राय: सभ्यता और संस्कृति को समानार्थी समझ लिया जाता है, जबकि ये दोनों अवधारणाएँ अलग-अलग हैं। तथापि विभेद ठीक वैसा ही है, जैसे हम एक फूल को सभ्यता और उसकी सुगन्ध को संस्कृति कहें। सभ्यता से किसी संस्कृति की बाहरी चरम अवस्था का बोध होता है। संस्कृति विस्तार है तो सभ्यता कठोर स्थिरता। सभ्यता में भौतिक पक्ष प्रधान है, जबकि संस्कृति में वैचारिक पक्ष प्रबल होता है। यदि सभ्यता शरीर है तो संस्कृति उसकी आत्मा। सभ्यता और संस्कृति में मौलिक अन्तर यह है कि, सभ्यता का सम्बन्ध जीवन यापन या सुख-सुविधा की बाहरी वस्तुओं से है, जबकि संस्कृति का सम्बन्ध आन्तरिक वस्तुओं से। सभ्यता की माप की जा सकती है, किन्तु संस्कृति की माप नहीं की जा सकती। उदाहरण के लिए - ऐसा बता देना अधिक आसान है कि साइकिल की अपेक्षा मोटरगाड़ी अधिक उपयोगी है, किन्तु प्रमाण प्रस्तुत करना कठिन है कि पश्चिमी संस्कृति की अपेक्षा भारतीय संस्कृति श्रेष्ठ है। इसके...

भारतीय उपनिषद परंपरा

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एक दिन विश्व प्रसिद्द वैज्ञानिक जार्ज गैमो की किताब का हिंदी रूपांतरण "परमाणु से सितारों तक " पढ़ रहा था । केवल दस पेज ही पढ़े होंगे उसमे आठ बार भारतीय गणितज्ञों ,उपनिषद की व्याख्याओं का जिक्र आ चुका था । यूं तो हम जैसो को कैटल क्लास समझने वाले से मुझे नफरत है लेकिन उसने भी पहली बार सही और अच्छी बात के रूप में इंग्लैण्ड में एक व्याख्यान में कहा था कि भारत के पास पंद्रहवी शताब्दी तक दुनिया की जी डी पी का लगभग तीस प्रतिशत हिस्सा था ,ब्रिटेन ने बहुत नुक्सान किया जिसकी उसे भरपाई करनी चाहिए । अभी एनीमल प्लेनेट देख रहा हूँ ,बोलने वाला आज २६ मई २०१८ को बता रहा है कि दुनिया में "लगभग " ८७ लाख जीवो की प्रजातियां है , हमारे यहाँ हम सैकड़ो साल पहले से जानते है कि जीवो की ८४ लाख योनिया है , एनीमल प्लेनेट वाला लगभग लगा रहा है , हमने नहीं लगाया था , उस किताब में लिखा था कि कई ऐसी जनजातियां है जिनके पास अगर दस जानवर हो और आप पूछे कितने जानवर है ,कहेगे बहुत से , दो या तीन होंगे तो दो या तीन बतायेगे लेकिन तीन के आगे गिनती नहीं जानते , हमारे सिवाय बाकी धर्म कहते है दुनिया ...