संस्कृति पार्ट-1
वर्तमान में वैश्विक महामारी के इस काल मे अधिकांश लोग आपको भारतीय सभ्यता और संस्कृति पे ज्ञान देते नजर आ जाएंगे।लेकिन इनमें कुछ मौलिक तथ्य जिन्हें समझने की जरूरत है प्राय: सभ्यता और संस्कृति को समानार्थी समझ लिया जाता है, जबकि ये दोनों अवधारणाएँ अलग-अलग हैं। तथापि विभेद ठीक वैसा ही है, जैसे हम एक फूल को सभ्यता और उसकी सुगन्ध को संस्कृति कहें। सभ्यता से किसी संस्कृति की बाहरी चरम अवस्था का बोध होता है। संस्कृति विस्तार है तो सभ्यता कठोर स्थिरता। सभ्यता में भौतिक पक्ष प्रधान है, जबकि संस्कृति में वैचारिक पक्ष प्रबल होता है। यदि सभ्यता शरीर है तो संस्कृति उसकी आत्मा। सभ्यता और संस्कृति में मौलिक अन्तर यह है कि, सभ्यता का सम्बन्ध जीवन यापन या सुख-सुविधा की बाहरी वस्तुओं से है, जबकि संस्कृति का सम्बन्ध आन्तरिक वस्तुओं से। सभ्यता की माप की जा सकती है, किन्तु संस्कृति की माप नहीं की जा सकती। उदाहरण के लिए - ऐसा बता देना अधिक आसान है कि साइकिल की अपेक्षा मोटरगाड़ी अधिक उपयोगी है, किन्तु प्रमाण प्रस्तुत करना कठिन है कि पश्चिमी संस्कृति की अपेक्षा भारतीय संस्कृति श्रेष्ठ है। इसके...