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इस्लामिक वास्तुकला का यथार्थ

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​ काशी में जो ज्ञानवापी मस्जिद के पीछे का हिस्सा है जिसपे हिंदू कलाकृति बने है वह मंदिर का ही हिस्सा है उसका प्रमाण यह की इन लोगों की अपना कोई वास्तुकला और शिल्पकला था ही नही क्यों की इस तरह के कला का विकास एक स्थायी और प्राचीन सांस्कृतिक विकास के साथ होता है इनके धर्म के आने से पूर्व यह तो क़बिलाई लोग थे । दरअसल जिसे भारत में मुगल वास्तुकला या फिर इस्लामिक वास्तुकला बताकर हमें आर्किटेक्चर पढाया जाता है, मुझे संदेह है कि मकान या कोई भी निर्माण करने की ऐसी वास्तुकला है जिसे मुगल वास्तुकला कहा जाए।  जैसे मुगल या इस्लामिक वास्तुकला के नाम पर एक बात जो सबसे प्रमुखता से बतायी जाती है वह है गुंबद। तो क्या गुंबद इस्लामिक वास्तुकला है? नहीं। ऐसा नहीं है। गुंबद का आविष्कार इस्लाम से पहले का है। गुंबद वाले ढांचे इस्लाम के पहले से वर्तमान इराक (मेसोपोटामिया) ईरान (पर्सिया) रोमन साम्राज्य और चीन में मिलता है। डोम या गुंबद वाले शिल्प को पहली दूसरी सदी के बेजंटाइन या फिर सासानियन आर्किटेक्चर के रूप में जाना जाता है।  तुर्की में आज जिसे हागिया सोफिया मस्जिद कहा जाता है, और जो आज तुर्की की पह...