किसान आंदोलन और वामी मानसिकता
वैश्विक राजनीतिक परिवेश में दुनिया ने जिस तरह से राष्ट्रवाद का दामन थामा है।हिंसक समर्थित विचारधारा के लोगो मे एक अजीब अकुलाहट की स्थिति आ गयी है।उदाहरण के यदि भारत को लिया जाय तो धारा 370 के हटने के बाद जनता में जिसप्रकार का सकारात्मक माहौल बना। उसके बाद से स्थिति और स्पष्ट दिखाई दे रहा है। नागरिकता संशोधन अधिनियम को आधार बनाकर दिल्ली के शाहीनबाग में जो दुष्प्रयोजित आंदोलन शुरू हुआ उसकी अंतिम परिणीति दिल्ली दंगा के रूप में देश के सामने आया।और उसके साथ जो खुलासे हुए उसने उस हिंसक विचारधारा के वैचारिकी को पुनः उजागर किया।इसके सफलता के बाद विश्व भर में इस वैचारिकी को मनाने बाले लोगो के आर्थिक मदद से शुरू हुआ तथाकथित किसान आंदोलन। मैं इसको तथाकथित इसलिए कह रहा हु की इस आंदोलन में दो प्रवृत्तिया मुख्य रूप से क्रियाशील थी।एक बाहरी प्रवृत्ति जो खुद को गांधी के अहिंसा पे आधारित सत्याग्रह का नाम दे रही थी तो दूसरी और वास्तविक प्रवृत्ति थी वह हिंसक रूप जिसने 26 जनवरी,और टिकरी बार्डर रेप कांड के रूप में अपने को प्रकट किया। दरअसल जिस लड़की का रेप इस हिंसक वैचारिकी के झंडे तले क...