भारतीय उपनिषद परंपरा

एक दिन विश्व प्रसिद्द वैज्ञानिक जार्ज गैमो की किताब का हिंदी रूपांतरण "परमाणु से सितारों तक " पढ़ रहा था । केवल दस पेज ही पढ़े होंगे उसमे आठ बार भारतीय गणितज्ञों ,उपनिषद की व्याख्याओं का जिक्र आ चुका था । यूं तो हम जैसो को कैटल क्लास समझने वाले से मुझे नफरत है लेकिन उसने भी पहली बार सही और अच्छी बात के रूप में इंग्लैण्ड में एक व्याख्यान में कहा था कि भारत के पास पंद्रहवी शताब्दी तक दुनिया की जी डी पी का लगभग तीस प्रतिशत हिस्सा था ,ब्रिटेन ने बहुत नुक्सान किया जिसकी उसे भरपाई करनी चाहिए । अभी एनीमल प्लेनेट देख रहा हूँ ,बोलने वाला आज २६ मई २०१८ को बता रहा है कि दुनिया में "लगभग " ८७ लाख जीवो की प्रजातियां है , हमारे यहाँ हम सैकड़ो साल पहले से जानते है कि जीवो की ८४ लाख योनिया है , एनीमल प्लेनेट वाला लगभग लगा रहा है , हमने नहीं लगाया था , उस किताब में लिखा था कि कई ऐसी जनजातियां है जिनके पास अगर दस जानवर हो और आप पूछे कितने जानवर है ,कहेगे बहुत से , दो या तीन होंगे तो दो या तीन बतायेगे लेकिन तीन के आगे गिनती नहीं जानते , हमारे सिवाय बाकी धर्म कहते है दुनिया दो हजार पांच हजार साल पुरानी है बेचारे उन जनजातियो की तरह है जिन्हे तीन हजार से आगे गिनना ही नही पता था ,जब यहाँ विश्व विद्यालय होते थे तब इन विकसित देशो के पास स्कूल भी न थे ,आज देश शौचालय का अभियान चला रहा है , हड़प्पा मोहन जोदाड़ो के समय भी बेहतरीन स्नानागार थे , गर्म और ठन्डे पानी की अलग व्यवस्थाएं थी ,भव्य बाबड़िया थी ,लगभग हजार साल पहले बने विशाल भव्य मंदिरो जैसे निर्माण एक आध सभ्यताओं के पास रहे होंगे , मुझे सेकुलरो से नफरत इसलिए नहीं है कि वो अफजल और कन्हैया के पक्ष में है ,यह बहुत छोटी बात है ,मुझे नफरत इसलिए है कि यह लोग हमारी ऐसी विकसित सभ्यता का मजाक बनाते है , झूठा बताते है ,मुद्दा मोदी या राहुल नहीं है , मुद्दे इससे कही बड़े है ।

रजनीश मिश्र
शोधछात्र-काशी हिंदू विश्वविद्यालय

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