वामपंथी साजिश में पिता -पुत्र संबंध

#father's day
आज की औलादें और आज के पिता दोनो ही गलत राह पर हैं। औलादें पित्र सत्ता को नकारती हैं। यह कम्युनिस्टों द्वारा बनाई गयी शिक्षा नीति का परिणाम है। और पिता पित्र सत्ता का रखवाला बना फिर रहा है। ऐसे मे पिता पुत्र टकराव होना ही है। कोई सामंजस्य नही कोई तालमेल नही। जब इंदिरा गाँधी प्रधान मंत्री बनी तब बहुमत के लिए उन्होने कम्युनिस्टों का सहारा लिया । कम्युनिस्टों ने सत्ता मे भागीदारी करके शिक्षा मंत्रालय की मांग की और हासिल किया। फिर सुरू हुआ इतिहास और भारतीय संस्कारों को बिकृत करने का दौर। कम्युनिस्ट मुसलमान शिक्षा मंत्री की कृपा से अकबर को महान और राणा प्रताप को बिद्रोही लिखा गया। औरंगजेब के कारनामे को छुपा लिया गया और इसलाम को महिमा मंडित किया गया।गुरु गोविन्द सिंह जी के बच्चों को किस क्रूरता से मारा गया यह इतिहास से हटा दिया गया।भारत के राजाओं को अयिआस,अत्याचारी,और प्रजा को लूटने वाला लिखा गया तथा दलित पिछडों पर सवर्णों को जुर्म करने वाला बताकर नफरत भरा गया।
                वेद पुराण और रामायण के संस्कारों को दकियानुसी बताया गया तथा मार्क्स,माओ के ग्रंथों को महान ज्ञान और दिशा देने वाला ग्रंथ माना गया। कुल मिलाकर समाज मे संस्कारों पर चौतरफा हमला करके पूरे भारतीय युवा पीढी को कम्युनिस्टी सिद्धान्त बाँटकर हिस्सा लेने की मानसिकता से भर दिया गया। पिता की कमाई को अपना हिस्सा मानने वाली औलादों की फसल पककर अब तैयार होरही है। निठल्लेपन से भरे और सपने की दुनिया के बादशाह इन निठल्ले औलादों से बापों का टकराव अब आम बात होगयी है। मैने बहुत उदाहरण देखे हैं जहाँ बाप बेटे मे बात चीत भी बंद है। कहीं औलादें आत्म हत्या कर रहीं हैं तो कही  बाप।कुल मिलाकर मै यही कहूँगा कि पानी सिर से ऊपर बह रहा है। अब तो तमाम शाक्षियां भी पित्र सत्ता को चुनौती देने लगी हैं। और अँग्रेजी मे बोल रहीं हैं कि दिस इज माय लायफ आ़य विल लीव इट ऐस आय विस।अरे मूर्खो एक माता पिता ही पृथ्वी पे जो जीवन और संतान में संतान को चुनते है।
                कौन बचाएगा हमारी आने वाली पीढियों को इस संस्करी हमले से?

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