वैज्ञानिक प्रगति और कोरोना
विश्व युद्ध के दौरान दुनिया मे बड़े बड़े आविष्कार हुए और पूरी दुनिया को इन आविष्कार ने बदल कर सुन्दर और सुगम बना दिया था ।युद्ध जीतने के लिए पूरी दुनिया की बौद्धिक ऊर्जा जागृत होगयी थी। दुश्मन को मात देकर युद्ध जीतने के लिए किये जारहे बौद्धिक और वैज्ञानिक प्रयासों के दौरान एक से बढकर एक वैज्ञानिक रहस्यों से पर्दा हटता गया और उसी की देन है कि हम आज दुनिया को अपनी मुट्ठी मे लेकर चलते हैं। आज विश्वयुद्ध से भी भयानक दुश्मन करोना वायरस हमे लीलने को आतुर है परन्तु मानव दिमाग से यह भी परास्त होगा। पूरी दुनिया की बौद्धिक और वैज्ञानिक ऊर्जा चौबिसो घंटे प्रयासरत हैं। देखना इन प्रयासों से करोना का तो सफाया होगा ही परन्तु प्रयासरत विज्ञान के हाथ प्रकृति के बहुत से जटिल रहस्यों का भी पता चलेगा जिससे अगले पचास वर्षों की दुनिया एक दम बदल चुकी होगी। क्या कभी किसी ने 1901 मे सोचा था कि 2020 मे दस साल का बच्चा मोबाइल पर गेम खेलेगा। वैसे ही 2099 मे दस साल के बच्चे के मनोरंजन के साधन की कल्पना हम आज नही करसकते। यह ब्रह्माण्ड अनन्त है,प्रकृति अनन्त है,रहस्य अनन्त है,ईश्वर इनन्त है और कल्पनाएं अनन्त होगी।
वही दूसरी तरफ करोना अब समाज मे बहुत खतरनाक बदलाव लाएगा।हमारे जीने का अंदाज बदल देगा। हमारी भावनाएं खतम होजीएंगी।हम शंका ग्रसित प्राणी बनकर जीने को बिवस होंगे। पति पत्नी तक का शारीरिक मिलन भी संवेदनावों और मनोभावों से हटकर मशीनी और असरसुरक्षा के डर मे दम तोड़ेगा। ऐसे शंकालु माहौल से जो संताने पैदा होंगी वह एक दम अमानवीय और स्वार्थी प्रबृति की होंगी। बहुत ही भयानक और दूरगामी परिणाम देगा यह करोना । एक बहुत ही बिचित्र दुनिया बनेगी जहाँ संवेदनाओं ,प्रेम, करुणा और भावनाओं के लिए कोई जगह नही होगी। एकदम रोबोटिक दुनिया।सोचकर सिहर जाता हूँ।
वही दूसरी तरफ करोना अब समाज मे बहुत खतरनाक बदलाव लाएगा।हमारे जीने का अंदाज बदल देगा। हमारी भावनाएं खतम होजीएंगी।हम शंका ग्रसित प्राणी बनकर जीने को बिवस होंगे। पति पत्नी तक का शारीरिक मिलन भी संवेदनावों और मनोभावों से हटकर मशीनी और असरसुरक्षा के डर मे दम तोड़ेगा। ऐसे शंकालु माहौल से जो संताने पैदा होंगी वह एक दम अमानवीय और स्वार्थी प्रबृति की होंगी। बहुत ही भयानक और दूरगामी परिणाम देगा यह करोना । एक बहुत ही बिचित्र दुनिया बनेगी जहाँ संवेदनाओं ,प्रेम, करुणा और भावनाओं के लिए कोई जगह नही होगी। एकदम रोबोटिक दुनिया।सोचकर सिहर जाता हूँ।
रजनीश मिश्र
शोधछात्र-काशी हिंदू विश्वविद्यालय
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