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राजघाट पर फूल, जंतर-मंतर पर ख़ामोशी!

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क्या गांधी आज केवल एक स्मृति बनकर रह गए हैं? क्या हर वर्ष 2 अक्टूबर को राजघाट जाकर पुष्प अर्पित कर देना, श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर देना और उनके चित्र पर माल्यार्पण कर देना ही गांधी को याद करने का अर्थ है? यदि ऐसा है तो यह गांधी के प्रति सबसे बड़ा अन्याय है। गांधी केवल एक व्यक्ति नहीं थे, वे सत्य, अहिंसा, संवाद, नैतिक साहस और जनशक्ति के प्रतीक थे। उन्होंने दुनिया की सबसे शक्तिशाली औपनिवेशिक सत्ता को तलवार से नहीं, बल्कि सत्याग्रह, सविनय अवज्ञा और अहिंसक संघर्ष के बल पर चुनौती दी। उन्होंने यह विश्वास जगाया कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता की नैतिक चेतना और शासन की संवेदनशीलता में निहित होती है। इसलिए गांधी को केवल स्मारकों, डाक टिकटों और सरकारी समारोहों तक सीमित कर देना उनके विचारों का सम्मान नहीं, बल्कि उनका औपचारिककरण है। आज प्रश्न यह नहीं है कि हम गांधी को कितना याद करते हैं, बल्कि यह है कि क्या हमारी शासन व्यवस्था गांधी के बताए हुए मूल्यों पर चलने की इच्छा रखती है? यदि कोई नागरिक, वह भी देश का एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, शिक्षक और नवप्रवर्तक, लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर र...

व्यक्ति और संस्कृति का द्वंद्व

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मनुष्य का व्यक्तित्व किसी एक क्षण में निर्मित होने वाली घटना नहीं, अपितु दीर्घकालिक अनुभव, परिस्थितियों, संस्कारों, विकल्पों तथा आत्मचेतना की निरंतर साधना का परिणाम होता है। इसी प्रकार संस्कृति भी किसी एक व्यक्ति अथवा एक पीढ़ी की रचना नहीं होती, बल्कि असंख्य व्यक्तियों के जीवनानुभव, मूल्यबोध, संघर्ष, साधना, संवेदना और सृजनशीलता के समन्वित प्रवाह से निर्मित होती है। यदि व्यक्ति संस्कृति का वाहक है तो संस्कृति व्यक्ति की अंतःचेतना का परिष्कृत रूप है। इस पारस्परिक संबंध को समझने के लिए तीन अत्यंत सार्थक अवधारणाएँ हमारे समक्ष उपस्थित होती हैं—अभाव, प्रभाव और स्वभाव। ये तीनों केवल मनोवैज्ञानिक अथवा सामाजिक अवस्थाएँ नहीं हैं, बल्कि मनुष्य के मूल्यबोध, जीवन-दृष्टि, सांस्कृतिक चेतना और चरित्र-निर्माण के मूलाधार हैं। किसी व्यक्ति की संपूर्ण जीवन-यात्रा को यदि सूक्ष्मता से देखा जाए तो ज्ञात होता है कि वह या तो अभाव से संचालित होता है, या प्रभाव से, अथवा स्वभाव से। इन तीनों अवस्थाओं से उत्पन्न संस्कृति, जीवन-मूल्य, निर्णय-प्रक्रिया, सामाजिक व्यवहार और आत्मबोध में अत्यंत गहरा अंतर विद्...